*कोंडागांव दी उग्र आंदोलन की चेतावनी जिला बदर करने पर*




*ग्लोबल न्यूज रिपोर्टर ओमप्रकाश नाग की रिपोर्ट कोंडागांवसे*
*पूर्व सैनिक बुधसिंह नेताम को जिला बदर करने पर गोंडवाना समाज व आदिवासी संगठन ने जयाया भारी विरोध*
*दी उग्र आंदोलन की चेतावनी*
कोंडागांव: गोण्डवाना समाज व सर्व आदिवासी समाज ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि तिरू.बुधसिंह नेताम पिता तिरु.मंगलू राम नेताम निवासी फारेस्ट कालोनी कोंडागांव को जिन्होने अपने जीवन के सत्रह
साल भारतीय सेना में सेवा देने के बाद सेवा समाप्ति से वापस आकर सत्र 2017 में समाज के द्वारा जिला कोंडागांव गोंडवाना समाज समन्वय समिति पं.क्र.1033/92 का जिला अध्यक्ष के पद पर मनोनयन किया गया तथा अपने 3 वर्ष के सामाजिक दायित्वों का सफल निर्वहन तथा सामाजिक व्यवस्थाओं जिसमें रीति,नीति,संस्कृति तथा रूढी़ व प्रथा को संरक्षित रखने तथा सामाजिक व संवैधानिक हक ,अधिकारों के लिए संविधान के दायरे में रहकर हमेशा ही समाज का कुशल नेतृत्व क्षमता के कारण समाज ने पुनः तिरु.बुधसिंह नेताम जी को सत्र 2021 में गोंडवाना समाज समन्वय समिति जिला कोंडागांव का जिला अध्यक्ष पद पर मनोनित किया।
यह कि तिरु.बुधसिंह नेताम अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय (युवावस्था)पूरे अनुशासन में रह कर सत्रह वर्ष तक देश सेवा में दिया और तत्पश्चात जब तक जिलाध्यक्ष के पद पर रहे वे किसी भी तरह के देशद्रोह ,मर्डर,बलात्कार,चोरी,लूट,हत्या या अन्य कोई असंवैधानिक कार्य में संलिप्त नही रहा है ।जबकि इन्होने हमेशा समाज हित में समाज के लिए संविधान में निहित व्यवस्थाओं के लिए चूंकि यह पांचवी अनुसूची क्षेत्र होने के कारण अपने संवैधानिक अधिकारों चाहे वह स्थानीय भर्ती का मामला हो जिसमें इस जिले में निवास करने वाले समस्त समुदाय (एसटी,एससी,ओबीसी तथा अन्य सभी) के पढे़ लिखे बेरोजगारों के खातिर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने हेतु अपने पेंशन पैसे से पूरे छ.ग.में पहला व्यक्ति है जो आर्थिक सहयोग किया है। अजजा आरक्षण का मुद्दा हो,या सत्र 29 जुलाई 2022 में घटित संदेहास्पद चार अध्ययनरत स्कूली बच्चों का मामला रहा हो,हमेशा समाज के साथ रहकर सामूहिक निर्णय के साथ शासन -प्रशासन से संवैंधानिक न्याय की मांग संविधान की दायरे में रहकर समाज को मजबूत प्रतिनिधित्व दिया ।
जन सामान्य को यह भी विदित हो कि कलेक्टर जिला कोंडागांव ने पुलिस अधीक्षक के द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन मात्र के आधार पर यह कहते हुए कि “आम नागरिकों के सामान्य जनजीवन में प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है”।जबकि
संपूर्ण जिला कोंडागांव में गोंड समाज का बाहुल्यता लगभग 78 से 80% है और जिले में ऐसा एक भी परिवार नहीं है,जिनके सामान्य जनजीवन पर बुधसिंह नेताम के कारण कोई भी प्रतिकूल प्रभाव पडा़ हो और जिसके बिना पर जिलाबदर जैसी कार्यवाही बिल्कुल भी न्यायोचित नही है ।बल्कि बुधसिंह नेताम का जिलाध्यक्ष बनने के बाद से ही चूंकि वह हमेशा निष्पक्ष,निडर तथा समाजहित में किसी भी मुद्दे पर समझौता नहीं करने के कारण हमेशा पुलिस प्रशासन के नजरों में खटकता रहा ,जिसके चलते पुलिस प्रशासन षडयंत्रपूर्वक अनावश्यक रूप से समाज के नजर में निराधार आरोप लगाकर व्यक्तिगत रूप से प्रताडि़त करता आ रहा है ।आज तक जितने मामलों का हवाला देकर कलेक्टर कोंडागांव ने जिलाध्यक्ष को जिलाबदर का आदेश दिया है ,उन सभी मामलों में दोषसिद्ध नहीं हुआ है और न ही इतने बडे़ फैसले के पूर्व समाज का पक्ष जानने /सुनने का अवसर भी नहीं दिया जाना बिल्कुल ही अनुचित तथा निंदनीय है एवं एक पक्षीय कार्यवाही से समाज में रोष व्याप्त है,बुधसिंह नेताम के साथ पूरा कोंडागांव जिले का गोंड समाज व अन्य मुलनिवासी समाज है।
गोंडवाना समाज के शीर्ष नेतृत्व के ऊपर इस तरह कार्यवाही कर प्रशासन आदिवासीयों को नेतृत्वहीन करने का प्रयास के साथ आदिवासियों की आवाज को कुचलते हुए समाज में दहशत का माहौल पैदाकर हमारी जल,जंगल ,जमीन एवं संवैधानिक हक अधिकार,परंपरा,रीति,नीति,संस्कृति,रूढी़ व प्रथा से वंचित कर समाज में भय व आतंक का माहौल बनाकर शासन करने का प्रयास प्रतीत होता है।
जिले के सर्वाधिक बाहुल्य समाज के जिलाध्यक्ष के विरूद्ध दिए गये गलत आदेश का समाज पूरजोर विरोध करता है तथा यदि इस आदेश को निरस्त नहीं किया जाता है तो जिले ही नहीं पूरे संभाग स्तर पर विरोध रैली व आंदोलन समाज के द्वारा किया जाएगा ।किसी भी प्रकार की जन-धन की हानि या आंदोलन की संपूर्ण जवाबदारी जिला मजिस्ट्रेट /कलेक्टर कोंडागांव की होगी ।