उत्तर प्रदेश ग्लोबल न्यूज वेबप्रयागराज ग्लोबल न्यूजसंपादक हरीश चौबेसबसे पहले सबसे आगे न्यूज

*कलम की क्रांति: प्रयागराज में पत्रकारों ने दिखाई ताकत*

*प्रयागराज ग्लोबल न्यूज रामआश्ररे की विशेष रिपोर्ट*

प्रयागराज में पत्रकारों ने शंकराचार्य मसले पर प्रेस वार्ता में अधिकारियों को घेर लिया। डीएम, कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर को बिना सवालों का जवाब दिए जाने नहीं दिया गया। पत्रकारों ने अधिकारियों को उल्टे पाँव लौटने पर मजबूर कर दिया

मुख्य बिंदु:

– पत्रकारों ने अधिकारियों को घेर लिया
– डीएम, कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर को जवाब देना पड़ा
– पत्रकारों ने अपनी ताकत दिखाई
– भारतीय मीडिया फाउंडेशन की भविष्यवाणी सच हुई 🔥

पत्रकारों का जज्बा

पत्रकारों ने अपनी कलम की मर्यादा को झुकने नहीं दिया। उन्होंने अधिकारियों को जवाबदेही के लिए मजबूर किया। यह घटना पत्रकारिता की जीत है और आम आदमी की जीत है

भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार

भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार की वह भविष्यवाणी आज सच साबित हुई, जिसमें उन्होंने ‘कलम की क्रांति’ का आह्वान किया था। उनके शब्दों ने पत्रकारों की रगों में वो बारूद भर दिया है, जो अब भ्रष्टाचार के किलों को ढहाने के लिए तैयार है।
यह इलाहाबाद है, यहाँ की रग-रग में बगावत है।
प्रयागराज की मिट्टी की तासीर ही कुछ ऐसी है। यहाँ की हवाओं में साहित्य है, तो लहजे में बगावत है।यहाँ का पत्रकार जब कैमरा संभालता है, तो वह केवल तस्वीर नहीं खींचता, बल्कि व्यवस्था का एक्सरे करता है। जब वह कलम उठाता है, तो वह केवल समाचार नहीं लिखता, बल्कि भ्रष्टाचारियों का डेथ वारंट लिखता है।
अधिकारियों को जिस तरह से ‘रगड़ा’ गया, वह इस बात का संकेत है कि अब ‘कैमरे की नजर’ से कोई बच नहीं पाएगा। जो भ्रष्टाचारी मैदान छोड़कर भागे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि यह तो बस शुरुआत है।
जनमानस के लिए एक संदेश:-
यह घटना केवल पत्रकारों की जीत नहीं है, बल्कि उस आम आदमी की जीत है जिसका भरोसा मीडिया पर से डगमगा गया था। यह संदेश है उन सभी के लिए जो सत्ता के मद में चूर होकर जनता के सवालों को अनसुना कर देते हैं।
सीरियस नोट: लोकतंत्र तभी बचेगा जब सवाल पूछने वाले जिंदा रहेंगे।
व्यंग्य: साहबों की तेज चाल बता रही थी कि उन्हें सवालों से ज्यादा अपनी कुर्सी की गर्मी प्यारी है।
भावुकता: उन पत्रकारों के जज्बे को सलाम, जिन्होंने आज अपनी कलम की मर्यादा को झुकने नहीं दिया।
वक्त बदल रहा है… क्योंकि अब कलम बोल रही है।

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