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* कुत्ते का जूठा खाना परोसा, हाई कोर्ट ने मुआवजा देने का आदेश दिया*

*भाटापारा ग्लोबल न्यूज जुगल किशोर तिवारी की रिपोर्ट**स्कूल में छात्रों को कुत्ते का जूठा खाना परोसा, हाई कोर्ट ने प्रभावितों को मुआवजा देने का आदेश दिया*

  भाटापारा 23 अगस्त/ चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डीबी ने बलौदाबाजार – भाटापारा जिला के लच्छनपुर शासकीय स्कूल में बच्चों को कुत्ते का जूठा खाना परोसे जाने के मामले में प्रभावित छात्रों को मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस सम्बंध में शासन की ओर से शपथ पत्र पेश कर स्कूल के एच एम को निलंबित करने की जानकारी दी गई। उल्लेखनीय है कि बलौदाबाजार – भाटापारा जिले के पलारी विकासखंड के लच्छनपुर गाँव में स्थित एक शासकीय मध्य विद्यालय में 28 जुलाई, 2025 को छात्रों को ऐसा भोजन परोसा गया जिसे कुत्ते ने चाटा था। जब छात्रों ने अपने अभिभावकों को इसकी सूचना दी, तो विद्यालय समिति की एक बैठक हुई और अभिभावकों के दबाव में 83 छात्रों को एंटी-रेबीज की दो-दो खुराकें दी गईं। आक्रोशित अभिभावकों ने अपराधियों के खिलाफ जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सम्बंधित खबर को हाई कोर्ट ने संज्ञान में लेकर नोटिस जारी किया एवं जवाब मांगा था। नोटिस पर कलेक्टर, बलौदाबाजार – भाटापारा ने जवाब पेश कर कोर्ट को बताया कि अस्थायी रूप से जय लक्ष्मी स्वा सहायता समूह को हटा दिया गया जिसने अस्वच्छ भोजन परोसा था। इस घटना की सूचना राज्य के मुख्यमंत्री को दी गई है ताकि मामले की जाँच की जा सके। पलारी के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट ने उप-विभागीय अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है जो मामले की जाँच करेगी। कोर्ट ने मामले में कहा समाचार से पता चलता है कि जब छात्रों ने आवारा कुत्तों को भोजन चाटते देखा, तो इसकी सूचना विद्यालय प्रशासन को दी गई, हालाँकि, विद्यालय प्रशासन का कहना है कि उन्होंने कुत्तों द्वारा चाटे गए भोजन को परोसने से रोका था, लेकिन फिर भी स्वा सहायता समूह ने वही वितरित किया। प्रकाशित समाचार के अनुसार 84 छात्रों ने उक्त भोजन खाया था, लेकिन 78 छात्रों को एंटी-रेबीज की पहली खुराक दी गई थी।
जिला शिक्षा अधिकारी, बलौदाबाजार – भाटापारा ने प्रधानाध्यापक और संकुल समन्वयक को नोटिस जारी किया है और उनका जवाब मिलने पर, आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह बेहद आश्चर्यजनक है कि स्व सहायता समूह, जो छात्रों को भोजन परोसने के लिए ज़िम्मेदार हैं, सुरक्षा और स्वच्छता का ध्यान रखे बिना अपने कर्तव्यों का पालन लापरवाही से कर रहे हैं। प्रकाशित तस्वीर खबर के साथ ही मिट्टी के चूल्हे पर दो बर्तन खुले में पड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें कोई भी आवारा जानवर, चाहे वह कुत्ते हों, सूअर हों, चूहे हों आदि, खा/गंदा कर सकते हैं। स्कूल में तैनात शिक्षक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं दिखते, जो घोर लापरवाही है। दोनों ही खबरों में अलग-अलग संख्या में बच्चों को एंटी-रेबीज खुराक दी गई है। जैसे ही शिक्षकों को पता चला कि खाना कुत्ते ने चाट लिया है, उसे तुरंत हटा दिया जाना चाहिए था और किसी भी छात्र को उसे खाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। ऐसा प्रतीत होता है कि स्व सहायता समूह की ओर से गंभीर लापरवाही हुई है, और साथ ही शिक्षकों और छात्रों का जीवन खतरे में पड़ गया है क्योंकि एक बार रेबीज से संक्रमित होने के बाद, कोई इलाज उपलब्ध नहीं है।
बशर्ते स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को भोजन उपलब्ध कराना कोई कोरी औपचारिकता नहीं है और इसे सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। किसी व्यक्ति, खासकर मासूम बच्चे को ऐसी कोई भी खाने की चीज़ नहीं परोसी जा सकती जिसे कुत्ते ने चाटा/गंदा किया हो। जब राज्य सरकार स्कूलों और उनके उपकरणों के उत्थान के लिए इतना धन खर्च कर रही है, तो इसके लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों की ओर से ऐसी चूकें हैं। कार्य करना, गंभीर चिंता का विषय है।
उपरोक्त के मद्देनजर, सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया जाता है कि वे अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें जिसमें इस न्यायालय को सूचित किया जाए कि (i) क्या विद्यालय में गंदा भोजन खाने वाले प्रत्येक छात्र को रेबीज रोधी टीका लगाया गया है, (ii) संबंधित विद्यालय के शिक्षकों/प्रधानाध्यापकों के साथ-साथ स्वास सहायता समूह के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, (iii) क्या छात्रों को ऐसी लापरवाही के लिए कोई मुआवजा दिया गया है जिससे उनकी जान को खतरा हो गया है, (iv) और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए विभाग क्या एहतियाती उपाय करेगा।इस मामले में आज 19 अगस्त को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बिभु दत्त गुरु की डीबी में सुनवाई हुई। शासन की ओर से शपथ पत्र पेश कर जानकारी दी गई कि स्कूल के प्रधानपाठक को निलंबित किया गया है। स्व सहायता समूह को हटा दिया गया। सभी प्रभावित छात्रों को एंटी रेबीज टीका लगाया गया है। कोर्ट ने मामले में प्रभावित बच्चों को मुआवजा देने का आदेश दिया है।

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