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*खतरे के साये में बिलासपुर खनिज विभाग*

हरीश चौबे संपादक ग्लोबल न्यूज लाइव छत्तीसगढ़

!!!बिलासपुर ग्लोबल न्यूज लाइव!!!*खतरे के साये में खनिज विभाग: जर्जर भवन में चल रहा सरकारी कार्यालय, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा!*
*छत से झड़ रहा प्लास्टर, दीवारों में गहरी दरारें, कर्मचारी और आम नागरिक हर दिन जोखिम उठाने को मजबूर; जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल*

प्रदेश में अवैध खनन पर कार्रवाई और करोड़ों रुपये के राजस्व की निगरानी करने वाला जिला खनिज विभाग स्वयं ऐसे भवन में संचालित हो रहा है, जिसकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। भवन की छत कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त दिखाई देती है, दीवारों में दरारें उभर आई हैं और जगह-जगह से प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। कर्मचारियों और कार्यालय आने वाले नागरिकों के बीच इस बात की आशंका बनी रहती है कि यदि समय रहते मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रतिदिन इस कार्यालय में खनिज पट्टों, रॉयल्टी, खनन अनुमति, शिकायतों और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन जिस भवन में यह कार्यालय संचालित हो रहा है, उसकी स्थिति सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। कई स्थानों पर पानी का रिसाव होने से भवन की मजबूती प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
कार्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति कोई नई समस्या नहीं है। लंबे समय से इसकी मरम्मत अथवा नए भवन की मांग की जाती रही है, लेकिन अब तक ठोस पहल नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप कर्मचारी भय के माहौल में अपनी जिम्मेदारियां निभाने को विवश हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पुराने और क्षतिग्रस्त सरकारी भवन का समय-समय पर तकनीकी परीक्षण कराया जाना चाहिए। यदि भवन उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं पाया जाता, तो तत्काल उसे खाली कर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
विडंबना यह है कि प्रदेश में खनिज संपदा के संरक्षण और राजस्व बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने वाला विभाग स्वयं अपने कार्यालय की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है। यह केवल एक भवन की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़ा करती है।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों की मांग है कि जिला प्रशासन तथा संबंधित विभाग तत्काल भवन का तकनीकी निरीक्षण कराए। यदि भवन असुरक्षित पाया जाता है, तो बिना विलंब कार्यालय को किसी सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किया जाए या नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए। क्योंकि किसी संभावित दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि समय रहते एहतियाती कदम उठाए जाएं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या फिर कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल निर्णय लिया जाएगा? आने वाले दिनों में जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई इस प्रश्न का उत्तर तय करेगी।

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