
*वृहद आंदोलन की विधायक द्वारा दी गई चेतावनी*

*भाटापारा ग्लोबल न्यूज जुगल किशोर तिवारी की रिपोर्ट*******सदानीरा शिवनाथ की घोर दुर्दशा दोहन की मनमानी*
*वृहद आंदोलन की विधायक द्वारा दी गई चेतावनी*
*संवर्धन की शून्यता दोहन की अधिकता संकट मे शिवनाथ की प्रासंगिकता*
भाटापारा 18 अप्रैल/महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र से निकलने वाली छत्तीसगढ की महत्वपूर्ण पहचान सदानीरा शिवनाथ का यह नाम उसकी विशिष्टता के कारण पड़ा है,सदानीरा का तात्पर्य सदैव जल से परिपूर्ण और यही विशेषता इस नदी को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती है,साथ ही साथ इस नदी के उदगम से जुड़ी मान्यताएं जहां शिव भक्ति का प्रताप अभिव्यक्त करती है वहीं अमर प्रेम की उद्दात भावना भी सदानीरा शिवनाथ के माध्यम से अभिव्यक्त होती है।इसके अलावा इस नदी की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि शिवनाथ का उदगम न किसी पर्वत झील या सरोवर से हुआ है वरन इस नदी की उत्पत्ति खेत के मेड़ से हुई है।
*अमर प्रेम की गाथा सदानीरा शिवनाथ*
अन्य नदियों के उलट खेत के मेड़ से अवतरित हुई सदानीरा शिवनाथ की उदगम कथा भी भक्ति एवं प्रेम की अनुपम बानगी है, कहा जाता है कि
एक सीधा और भोला आदिवासी युवक महादेव का परमभक्त था। उसकी शिव-भक्ति को देखकर गाँव के सियान (बुजुर्ग) उसे शिवनाथ कहने लगे। उसकी सदचरित्रता से सभी प्रभावित रहते थे,गांव के एक बड़े किसान की पुत्री पारू का आकर्षण भी शिवनाथ के प्रति दिनोंदिन बढ़ता जा रहा था और धीरे धीरे यह आकर्षण शिवनाथ पारु के उद्दात प्रेम के रुप मे परिवर्तित हो गया, लेकिन परिस्थतियां बदली और शिवनाथ पारु के प्रेम को विकट स्थितियों से गुजरना पड़ा तथा शिवनाथ को अपनी जान भी गंवानी पड़ी कहा जाता है जिस खेत के मेड़ मे शिवनाथ की मृत्यु हुई एवं उसके वियोग मे पारु ने भी अपने प्राणों का त्याग किया वहां भगवान भोलेनाथ की कृपा से यह उद्दात प्रेम धारा जलधारा के रूप में सदानीरा शिवनाथ बनकर निरंतर प्रवाहित हो रही है और प्रेम के उज्ज्वल एवं उद्दात पक्ष को उद्घाटित भी कर रही है!
*दोहन की शिकार पीड़ा का अंबार*
प्रेम के अत्यंत उद्दात भाव की प्रतीक भगवान भोलेनाथ की भक्ति के गहन भाव की अभिव्यक्ति सदानीरा शिवनाथ आज गहन पीड़ा के दौर से गुजर रही है,भाटापारा सहित विभिन्न क्षेत्रों की जीवनदायनी इस नदी के प्रासंगिकता एवं अस्तित्व पर ही संकट खड़ा होता हुआ प्रतीत हो रहा है,छत्तीसगढ की प्रमुख पहचान सदानीरा शिवनाथ आज जल विहिनता की ओर बढ़ रही है,जिसका सीधा कारण अतिशय दोहन स्पष्ट रुप से परिलक्षित हो रहा है,जल दोहन के रुप मे जहां उद्योगों एवं ग्रीष्म फसल के लिए जमकर जल का दोहन किया जा रहा है जिसके चलते जगह जगह नदी मे सूखे के परिदृश्य नजर आ रहें है,वहीं रेत के अपार भंडार वाले शिवनाथ मे अवैध रेत उत्खनन की दिनों दिनों बढ़ती तादाद इसके अस्तित्व एवं स्वरुप पर ही संकट खड़ा करती हुई प्रतीत हो रही है।
*विधायक द्वारा वृहद आंदोलन की चेतावनी*
सदानीरा शिवनाथ की दुर्दशापूर्ण स्थिति जिसकी इस भीषण गर्मी मे हो रही स्पष्ट रुप से अभिव्यक्ति सुचिता पसंद जनमानस को उद्वेलित करती हुई प्रतीत हो रही है,तथा संरक्षण एवं संवर्धन की मांग अब जोर शोर से उठनी शुरु हो गयी है,क्षेत्र के विधायक इन्द्र साव द्वारा भी इस परिस्थति पर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा गया कि छत्तीसगढ की प्रमुख जीवनदायनी शिवनाथ नदी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है,जो कि प्राणी जगत के लिए चिंता का विषय है,इस नदी की बदहाली के लिए नदी से लगे अनेक औद्योगिक ईकाई अवैध रेत उत्खनन नदी किनारे ग्रीष्मकालीन फसल आदि प्रमुख कारण से शिवनाथ नदी बेमौत मर रही है,एनीकेट होने के बावजूद पानी संरक्षित नहीं हो पा रहा है,साथ ही साथ शिवनाथ नदी की सुरक्षा के लिए शासन प्रशासन के पास निश्चित मापदण्ड का अभाव भी नजर आ रहा है, विधायक द्वारा उपरोक्त परिस्थिति के मद्देनजर यही कहा गया कि आवश्कता पड़ी तो नदी की रक्षा के लिए वृहद स्तर पर आंदोलन भी किया जाएगा।
