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अमरकंटक ग्लोबल न्यूजमध्य प्रदेशसंपादक हरीश चौबेसबसे पहले सबसे आगे न्यूज

*परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज हुए  ब्रह्मलीन*

*अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट *

अध्यात्म जगत की दैदीप्यमान विभूति धारकुंडी महाराज’
परम पूज्य श्री परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज हुए  ब्रह्मलीन

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित आश्रम श्री परमहंस धारकुंडी आश्रम अमरकंटक के संत स्वामी श्री लवलीन महाराज जी ने बताया कि आज हमारे गुरुदेव ब्रह्मलीन हो ग‌ए   हैं । अध्यात्म जगत के स्थितप्रज्ञ , ब्रह्मनिष्ठ एवं युगद्रष्टा संत  ‘ धारकुंडी महाराज ’ के नाम से विख्यात परम पूज्य श्री परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने 102 वर्ष की दीर्घ तपस्वी आयु में अपने पार्थिव देह का त्याग कर ब्रह्मलीन हो ग‌ए ।
परम पूज्य अनंत श्री विभूषित स्वामी जी श्री परमहंस स्वामी परमानंद जी महाराज के प्रथम स्थितप्रज्ञ शिष्य थे तथा श्री परमहंस आश्रम की सर्वोपरि आध्यात्मिक विभूति के रूप में विख्यात रहे ।
अपने गुरुदेव परमहंस  जी के आशीर्वाद से 22 नवम्बर 1956 को धारकुंडी नामक स्थान पर प्रथम आगमन हुआ । स्वामी जी ने धारकुंडी आश्रम में साधना और तपस्या के माध्यम से साधको के मार्गदर्शन की शुरूआत की थी और लोककल्याणकारी आश्रम की स्थापना की । वे एक सिद्ध संत माने जाते थे । जिस एकांत वन में स्वामी जी साधना किए थे वह स्थल अब प्रसिद्ध तीर्थ के रूप में दिखाई दे रहा है । इस स्थल पर सैकड़ों संत , साधक रह कर साधना , भजन करते है ।

प्रमुख विवरण

दिन : शनिवार
तिथि (पंचांग अनुसार): फाल्गुन कृष्ण षष्ठी
दिनांक : 07 फरवरी 2026
समय: प्रातः 10:00 बजे
स्थान: मुंबई
आयु: 102 वर्ष
स्वामी जी ने अपने स्थूल देह का त्याग कर  ब्रह्मलीन हो ग‌ए ।

सदगुरुदेव भगवान , युगद्रष्टा ,ब्रह्मनिष्ठ , तपोनिधि , योगेश्वर एवं युगद्रष्टा जैसे विशेषणों से अलंकृत श्री परमहंस  स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने अपने 102 वर्षों के जीवन में अखंड साधना , तप और आत्मबोध की ज्योति प्रज्वलित रखी । उनकी दिव्य दृष्टि , ओजस्वी वाणी और योग साधना ने असंख्य संतों , विरक्त साधकों एवं गृहस्थ भक्तों को आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर किया ।
उनका ब्रह्मलीन होना न केवल धारकुंडी आश्रम  बल्कि संपूर्ण संत समाज एवं सनातन धर्म के लिए अपूरणीय क्षति है । वे सादगी , वैराग्य और उच्चतम आध्यात्मिक चेतना के सजीव प्रतीक थे ।

उनके स्नेही शिष्य मुन्ना उरमालिया रीवा ने कहा कि
“गुरुदेव का भौतिक शरीर हमारे मध्य नहीं रहा किंतु उनकी शिक्षाएँ , उनकी करुणा और उनकी दिव्य चेतना युगों-युगों तक साधकों का मार्गदर्शन करती रहेंगी ।”

    समाधि कार्यक्रम
प्राप्त जानकारी अनुसार परम पूज्य सद्गुरुदेव भगवान की समाधि का निर्माण कार्य पूर्व में ही विरक्त संतों , साधकों एवं भक्तों के सहयोग से परम पूज्य श्री सद्गुरुदेव भगवान के निर्देशानुसार पूर्ण कर लिया गया था । अतः परम पूज्य सद्गुरुदेव भगवान की समाधि —
स्थान : श्री परमहंस आश्रम , धारकुंडी (सतना) में विधिवत रूप से संपन्न की जाएगी । इस जगह पर सभी शिष्य , भक्त , प्रेमीजन पहुंच कर अंतिम दर्शन लाभ प्राप्त कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे ।

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