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कांकेर

*नक्सलियो की कमर तोड़ी(दहशत में आये माओवादी बैकफुट पर)*

नक्सलियो की कमर तोड़ी(दहशत में आये माओवादी बैकफुट पर)

//बिपल्ब कुण्डू–की रिपोर्ट//

पखांजुर//ग्लोबल न्यूज़//
नक्सली सप्ताह की पृष्ठभूमि में नक्सल विरोधी अभियान के डीआईजी संदीप पाटिल ने बताया कि पुलिस ने अभियान चलाकर नक्सलियों की कमर तोड़ रखी है. पिछले 5 सालों में नक्सलियों की मजबूत चेन को तोड़ने का काम हुआ कई इनामी नक्सलियों को मार गिराया गय नक्सल अब चैकफुट पर हैं. नक्सल विरोधी अभियान की वजह से | जिला नक्सलमुक्ति की तरफ बढ़ रहा है. नक्सल प्रभावित इलाकों में कई चौकियां स्थापित की जा चुकी हैं. 4 और चौकियां बनाई जा रही है. इसके बाद यह कहा जा सकता है कि यह इलाका नक्सल मुक्त हो चुका है।

क्या नक्सलियों की दहशत कम हुई ? :
उन्होंने कहा कि नक्सलियों की दहशत कम होने की वजह से ही इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में उद्योग स्थापित होने लगे हैं. माइनिंग के क्षेत्र में करीब 20 हजार करोड़ रुपयों का निवेश आया है. उद्योगपतियों के मन का डर खत्म हो गया है. साथ ही अब गडचिरोली में विकास के काम बड़े पैमाने पर हो रहे नागरिकों ने भी राहत की सांस ली है. विदर्भ, मध्यप्रदेश के बालाघाट क्षेत्रों में सक्रिय नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ सीमा पर साउथ बस्तर इलाके में फिलहाल अपना डेरा डाल रखा है. केंद्र सरकार की नीतियों के कारण नक्सली डरे हुए हैं. उन्हें लगता है कि श्रीलंका में एलटीटी को जैसे घेरकर खत्म किया गया, ठीक उसी तरह उन्हें भी निपटाया जा सकता है. वर्तमान में नक्सली केवल छत्तीसगढ़ मेंअधिक सक्रिय हैं।बात की जाए तो हमने 130 नक्सलियों को यमसदन में पहुंचाने का काम किया. 160 को गिरफ्तार किया और 72 नक्सलियों को आत्मसमर्पण करवाया.. जंगल में अपनी मोजूदगी को खतरा मानते हुए अब नक्सली अर्बन क्षेत्रों में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे है. लोकतंत्र में सिस्टम के खिलाफ खड़े होते हैं. शहरों में 58 संगठन ऐसे हैं, जो स्थानीय मुद्दों को उठाकर मामले को और बिगाड़ने में लगे रहते हैं. वर्तमान में नक्सलीयों से निपटने के लिए 6 हजार पुलिसकर्मी, 1500 एआरपीएफ के जवान और सीआरपीए की 5 कंपनियां डटी हुई हैं. क्या नक्सली कभी हथियार छोड़ सकते हैं? :
उन्होंने कहा कि नक्सली कभी भी हथियार नहीं छोड़ सकते. उनका मानना है कि बिना रक्त के क्रांति नहीं हो सकती. उनका घोषवक्य है कि लाल सलाम, लाल किला. नक्सलियों के खिलाफ फौजी कार्रवाई के संदर्भ में कहा कि फौज का काम देश की सीमा का रक्षण करना है. देश के भीतर की समस्या के लिए पुलिस के अलावा एसआपी, सीआरपीएफ जैसे संगठन मजबूत हैं. यही कारण है कि देश के कुल 650 जिलों में से वे 150 जिलों मैं सक्रिय थे. अब उनकी संख्या केवल 40 जिलों तक सीमित रह गई है. इनका वंदोबस्त अतिशीघ्र ही किया जायगा।

ड्रोन से निगरानी::-

हमने नक्सलियों से निपटने के लिए सभी प्रकार के आधुनिक संसाधनों का उपयोग शुरू किया है. ड्रोन के जरिये भी नक्सलियों पर निगरानी रखी जा रही है. हमारी कार्रवाइयों के चलते स्थानीय आदिवासियों का भरोसा बढा है और अब वे नक्सलियों पर भरोसा करने के बजाय हम पर भरोसा करने लगे हैं।

संदीप पाटिल (डीआईजी नक्सल विरोधी अभियान

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