
*आदिवासी छात्र युवा संगठन एक कदम शिक्षा की ओर नजरें का आयोजन किया गया*
*आज आदिवासी छात्रा युवा संघठन सर्कल छोटे बेटिया के कार्यकर्ताओ के द्वारा एक कदम* *शिक्षा की ओर नजरें बढ़ाते ग्राम पंचायत कंदाड़ी आश्रित* *गाँव आलदण्ड में एक सभा आयोजन किया गया।*
*बिप्लब कुण्डू-की-रिपोर्टर*
पखांजुर//ग्लोबल न्यूज़//
जिसमें गाँव के दर्जनो युवा युवतीयों एवं छात्र – छात्राए के साथ सबसे पहले वीरागना रानी दुर्गावती की बलिदान दिवस पर उनके छाया चित्र पर माल्या अर्पण कर अमर शहीद वीरान्गना रानी दुर्गावती को श्रद्धान्जलि अर्पित किये |
जिसमें सर्व आदिवासी समाज ब्लाक पखान्जूर के उपाध्यक्ष मैनी कचलाम ने अपने उद्बोधन में बातायी की रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्तूबर 1524 को एक राजघाराने में हुआ और वो बचपन से युद्ध कला से ओत प्रोत होने पर तीरान्जत जैसे युद्ध कला में काफी निपूर्ण थी वो जंगली जानवरो शेर भालू बाघ से लड़ने की इच्छा जताती थी और बाल्यकाल से ही तीव्र चंचल बुद्धि की थी मण्ड्ला गढ़ के राजा संग्रामशाह के बेटा राजकुमार दलपत शाह को उनके युद्ध की कला ने आकर्षित किया जिससे दलपत शाह के साथ विवाह हुआ
विवाह के उपरांत दलपत शाह की 4 वर्ष के तुरान्त बाद मृत्यु हो गया जिससे मंड्ला गढ की बागडोर अब दुर्गावती को उनके बेटा वीरनारायण को गद्दी में रख कर खुद संभाल ना पड़ा। वो अपने समृद्ध सम्पन्न राज्य में लगभग 14 वर्षो तक वहा की गौरव पूर्ण सुशासन व्यावस्था को बनाएं रखी और जनता को किसी प्रकार की तनीक भी आंच आने नही दी अंत में युद्ध के समय दुश्मनों से लड़ते वक्त वो जीवन के अंतिम पल में वो जीते जी दुश्मनों के हाथ नहीं पकड़ाने की अटल जिद्द सी अपने ही कट्टर निकल कर अपने सीने को कट्टार गुसा दी और अपने अस्मिता अस्तित्व आत्म सम्मान के लिए 24 जून 1564 को अमर बलिदान हो गई।
इसी प्रकार छोटे बेटियां सर्व आदिवासी समाज सर्कल अध्यक्ष अजित नरूटी ने कहा की जो छात्र छात्राएं 10 वी, 12वी की परीक्षा में असफल हुए हैं वो अभी ओपन स्कूल शिक्षा के लिय परीक्षा आवेदन किया जा रहा है सभी उसमें फॉर्म डाले और अपने पढ़ाई जारी रखें।
सर्कल अध्यक्ष सोमा नुरुटी, लक्ष्मण मंडावी, ने कहा छात्रों को अपने छात्र जीवन में आने वाले बाधाओं से नही घबरा ना चाहिए हर सफलता संघर्ष के बिना नही मिलता है मेहनत ही सफलता की कुंजी है ये वाक्य अटल सत्य है।
सुजीत, मोनिका गावड़े, सुमित्रा ने कहा महिलाओं को भी पढ़ाई में अव्वल रहना चाहिए क्यों को महिला शिक्षित होगी तो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए प्रेरणा देगी समाज में छुआ छूत की भावना को मिटान शिक्षा से ही संभव है।
इस सभा में दीप्ति कुजूर, सविता नुरूटी, सनत धुर्वा, निकोलस, विकास कुजूर, महेश पददा, मानू जुर्री, जैनी पददा, मानकी नुरूटी, सावित्री नुरूटी आदि उपस्थित हुई थे।

